सिखों के साथ ही यह भेदभाव कियूं ?
पिछली 16 जनवरी 2015 से
बापू सुरत सिहं जी भूख हड़ताल पर बैठें
हैं आज 16 जुलाई को 182 दिन बीत
चले है पर अफ़सोस की इंडियन मिडीया को यह दिखाई नही देता इस से ओर क्या साबत होता
है क्या भारत में सिखों के साथ भेद भाव नही हो रहा ?
बापू जी उन बे कसूर सिखों की रिहाई के लिए लद रहे है जो बिना कसूर के
पिछले कई सैलून से जेल की सलाखों के पीछे है | हलाकी जो कोट ने
उन्हें सज़ा दी थी वो भी पूरी काट चुके है पर उन्हें अभी तक जेल की सलाखों के पीछे
ही कियूं रखा है ?
सिख अपने हक की बात जब भी करते हैं तो उन्हें वखवादी, आंतकवादी विद्रोही करके
नवाज़ा जाता है कियूं ?
आज बापू
सुरत सिंह जी आखिरी स्वास गिन रहे है पर इंडियन मिडीया को यह कियूं दिखाई नही देता
एक कुता जन्तर मन्त्र पर बैठ जाता है तो यही मिडीया दम हिलती उसके आगे पीछे पढ़ी
दिखाई देती है पर जब कोई सिख हक की आवाज़ उठाये तो यही मिडीया अंधी हो जाती है ?

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